दो भाई राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री, बेटा मंत्री... श्रीलंका की लुटिया डुबाने वाले राजपक्षे की ये है फैमिली ट्री
Sri Lanka Economic Crisis: 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. श्रीलंका में राजपक्षे परिवार के चार भाइयों ने सत्ता पर राज किया है लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि महिंदा राजपक्षे और उनके परिवार को नौसेना बेस में शरण लेनी पड़ी है.
श्रीलंका अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है. प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के पद से इस्तीफा देने के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा और यह प्रदर्शन हिंसक हो गया है. हंबनटोटा में राजपक्षे परिवार के पैतृक घर को प्रदर्शनकारियों ने फूंक दिया. इसके साथ ही कई मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के भी घर जला दिए गए हैं. हिंसा में अब तक एक सांसद सहित आठ लोगों की मौत हो गई है और 250 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. हिंसा को लेकर महिंदा राजपक्षे की गिरफ्तारी की भी मांग की जा रही है.
देश में राजपक्षे परिवार से लोग काफी नाराज हैं. श्रीलंका में कई दशकों से सत्ता संभाल चुके राजपक्षे परिवार का काफी दबदबा रहा है. परिवार के चार भाइयों ने सत्ता पर राज किया है लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि महिंदा राजपक्षे और उनके परिवार को नौसेना बेस में शरण लेनी पड़ी है. इस बीच राजपक्षे के भारत भागने की भी खबर थी लेकिन उनके बेटे ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि हमारा परिवार देश छोड़कर कहीं नहीं जा रहा.
राजपक्षे परिवार ने श्रीलंका की क्षेत्रीय राजनीति से अपनी शुरुआत की थी. साल 2005 में महिंदा राजपक्षे देश के राष्ट्रपति चुने गए. इसके बाद राजपक्षे परिवार के लोग सत्ता के महत्पपूर्ण पदों पर काबिज हो गए. महिंदा राजपक्षे ने अपने छोटे भाई और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को डिफेंस सेक्रेट्री नियुक्त कर दिया. उन्होंने अपने एक और छोटे भाई बासिल राजपक्षे को राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया.
साल 2010 में वो फिर से राष्ट्रपति चुने गए. सबसे बड़े भाई चमल राजपक्षे को भी सत्ता में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया और वो कई बार मंत्री रहे. इसे लेकर राजपक्षे परिवार पर परिवारवाद, निरंकुशता और सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल के आरोप लगने लगे. एक वक्त कहा जाने लगा कि राजपक्षे परिवार देश की 70 फीसद बजट पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है
इन्हीं आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच साल 2015 का राष्ट्रपति चुनाव महिंदा राजपक्षे हार गए. लेकिन साल 2019 में फिर से राजपक्षे परिवार श्रीलंका के सबसे बड़े पद पर काबिज हुआ. इस बार महिंदा राजपक्षे के भाई गोटाबाया राजपक्षे राष्ट्रपति चुने गए. उनके सत्ता में आते ही भाई महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री चुन लिए गए.
गोटाबाया के भाई बासिल राजपक्षे फिलहाल श्रीलंका के वित्त मंत्री हैं और चमल राजपक्षे कृषि मंत्री हैं. चमल साल 1989 से ही श्रीलंका के सांसद हैं. महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे श्रीलंका के युवा और खेल मंत्री हैं. राजपक्षे परिवार से लगभग 7 लोग श्रीलंका की सत्ता के शीर्ष पदों पर काबिज हैं, जिसे लेकर विपक्ष सहित लोगों में भी गुस्सा भरा है.
गोटाबाया राजपक्षे पर भी निरंकुशता के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे भी आरोप हैं कि जो भी मंत्री उनकी नीतियों की आलोचना करते हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है.
ऐसा ही एक मामला कुछ समय पहले श्रीलंका के प्रमुख सासंद विजेदास राजपक्षे को लेकर आया था. वो राजपक्षे सरकार में न्याय और शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. वो श्रीलंका में चीन की कर्ज नीति और सरकार की खराब आर्थिक नीतियों के बड़े आलोचक रहे हैं. हॉन्गकॉन्ग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसी कारण विजेदास को अपने मंत्रीपद से इस्तीफा देना पड़ा था. सासंद विजेदास अब भी सरकार की आलोचना करने से परहेज नहीं करते हैं. श्रीलंका में आपातकाल और विदेशी मुद्रा संकट के चलते केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने भी अपना पद छोड़ दिया था.
, बिजलीघर पर तादेश में नहीं है ईंधन, पेट्रोल पंपला
श्रीलंका में ईंधन की भारी कमी है. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी होने से सरकारी यातायात ठप पड़ा है और लोग निजी वाहनों का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे क्योंकि ईधन तेल न होने से कई पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं. जहां तेल मिल रहा है वहां सेना की मौजूदगी है ताकि भीड़ के कारण किसी तरह की अव्यवस्था न पैदा हो. हाल ही में श्रीलंका में तेल की लंबी लाइन में खड़े दो लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद सरकार ने ये फैसला लिया है.
पेट्रोल पंप के बाहर लगी भारी भीड़ (Photograph Reuters)
श्रीलंका के बिजलीघरों को भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा है. श्रीलंका के लोगों को लगभग 13 घंटे अंधेरे में गुजारना पड़ रहा है. ईंधन की कमी से कई बिजलीघर बंद कर दिए गए हैं.

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